56–60 पुश-अप
| अगर आपने टेस्ट में 56–60 पुश-अप किए | |||
| दिन 1 – सेटों के बीच 60 सेकंड (या अधिक) आराम | |||
| सेट 1 | 30 | ||
| सेट 2 | 44 | ||
| सेट 3 | 40 | ||
| सेट 4 | 40 | ||
| सेट 5 | जितने कर सकें (कम-से-कम 55) | ||
| कम-से-कम 1 दिन आराम | |||
| दिन 2 सेटों के बीच 45 सेकंड (या अधिक) आराम | दिन 3 सेटों के बीच 45 सेकंड (या अधिक) आराम | ||
| सेट 1 | 22 | सेट 1 | 26 |
| सेट 2 | 22 | सेट 2 | 26 |
| सेट 3 | 27 | सेट 3 | 33 |
| सेट 4 | 27 | सेट 4 | 33 |
| सेट 5 | 24 | सेट 5 | 26 |
| सेट 6 | 23 | सेट 6 | 26 |
| सेट 7 | 18 | सेट 7 | 22 |
| सेट 8 | 18 | सेट 8 | 22 |
| सेट 9 | जितने कर सकें (कम-से-कम 58) | सेट 9 | जितने कर सकें (कम-से-कम 60) |
| कम-से-कम 1 दिन आराम | कम-से-कम 2 दिन आराम | ||
खेलों में पुश-अप का चुपचाप निभाया जाने वाला काम
किसी एथलीट के प्रशिक्षण में पुश-अप सबसे ऊपर शायद ही रहता है, और रहना भी नहीं चाहिए। फिर भी लगभग हर टीम के वॉर्म-अप या ऑफ-सीज़न ब्लॉक में यह मौजूद मिल ही जाता है। वजह बहुत साधारण और व्यावहारिक है — यह बिना किसी उपकरण के धकेलने वाली ताकत और धड़ की स्थिरता पर काम करता है, घुटनों वाले आसान रूप से लेकर एक-हाथ वाले कठिन रूपों तक ढल जाता है, और कोच एक साथ 15 खिलाड़ियों को करते देखकर पकड़ सकता है कि कौन तकनीक में कोताही कर रहा है। यह मेल आसानी से नहीं मिलता।
जहाँ असली फ़ायदा दिखता है
संपर्क और फेंकने वाले खेलों में — रग्बी, फ़ुटबॉल, हॉकी, थ्रो की स्पर्धाओं में — पुश-अप वही मांसपेशियाँ सक्रिय करता है जो किसी दूसरे शरीर के सामने टिकते या छाती से किसी चीज़ को धकेलते समय काम आती हैं: छाती, ट्राइसेप्स, कंधों का अगला हिस्सा और शरीर को कड़ा रखने वाला पूरा अगला धड़। यह बेंच प्रेस या ओलंपिक लिफ्ट जैसा नहीं है, पर उस धकेलने वाली बुनियाद को कम खर्च में बनाने और बनाए रखने का यह एक तरीका है, खासकर सीज़न के दौरान जब भारी बारबेल का काम घटा दिया जाता है।
कंधे के इर्द-गिर्द बने खेलों में — तैराकी, टेनिस, वॉलीबॉल, बेसबॉल — इसका महत्व कच्ची ताकत से हटकर स्थिरता और कंधे की सहनशक्ति की ओर चला जाता है। ऐसे पुश-अप रूप जो कंधे के फलकों से काम करवाएँ — पैर ऊँचे रखकर, रिंग्स पर, या धीमी नियंत्रित गति से — यहाँ सिर्फ़ गिनती बढ़ाने से ज़्यादा मायने रखते हैं। जिम्नास्ट को शायद इसका सबसे अधिक लाभ मिलता है, क्योंकि अपने ही वजन को धकेलते हुए शरीर की सीधी, कड़ी रेखा बनाए रखना उनके खेल की माँग के बहुत करीब है।
यह क्या नहीं करेगा
साफ़ बात यह है — पुश-अप आपको तेज़ नहीं बनाएगा, आपकी तकनीक नहीं सुधारेगा, और उन खेलों को नहीं संभाल सकता जिनकी जान पैरों में बसती है। एक धावक या फ़ुटबॉल खिलाड़ी को कमर के नीचे के काम से कहीं ज़्यादा मिलता है। प्रशिक्षित खिलाड़ी के लिए पुश-अप जल्दी ही आसान भी पड़ने लगता है — जब आप 40 साफ़ रेप आराम से कर लेते हैं, तब आप ताकत नहीं, सहनशक्ति बना रहे होते हैं, और आगे बढ़ने के लिए लीवरेज बदलना या वज़न जोड़ना पड़ता है। इसे ही पूरा प्रशिक्षण मान लें तो यह एक बंद गली है।
फिर कोच इसे क्यों रखते हैं
तो पुश-अप इसलिए टिका हुआ है क्योंकि यह भरोसेमंद है, जादुई नहीं। यह वह व्यायाम है जिसे सफ़र में, होटल के कमरे में, बिना किसी रैक वाले मैदान पर, लंबे ब्रेक से लौट रहे खिलाड़ी के लिए या 100 खिलाड़ियों की टोली के लिए रखा जा सकता है। यह कुछ माँगता नहीं और बदले में धकेलने वाली ताकत तथा धड़ के नियंत्रण की एक भरोसेमंद बुनियाद देता है। यह एक मामूली काम है, और इसे यह हर बार निभाता है — यही वजह है कि यह प्रशिक्षण से कभी बाहर नहीं होता।