100 पुश-अप

100 पुश-अप कैसे करें

दंड (हिन्दू पुश-अप)

दंड भारत की पारंपरिक कसरतों में से एक है, एक बहते हुए अंदाज़ वाला पूरे शरीर का पुश-अप जिसमें आप एक ही झटके में ऊपर-नीचे नहीं होते, बल्कि एक लहरदार चाप में आगे-पीछे झूलते हैं। सदियों से पहलवान अखाड़े में कुश्ती की तैयारी के लिए दंड लगाते आए हैं, और यह आज भी भारतीय व्यायाम परंपरा की सबसे पहचानी जाने वाली कसरतों में से एक है। एक दंड में शरीर ऊँचे कूल्हों वाली उलटी V से शुरू होकर छाती को ज़मीन के पास ले जाता है और फिर सीना खोलते हुए ऊपर उठता है।

एक व्यक्ति दंड लगाते हुए, छाती को नीचे और आगे की ओर चाप में ले जाते हुए

दंड कैसे लगाएँ

  1. सबसे पहले उलटी V की मुद्रा में आएँ: हाथ और पैर ज़मीन पर, कूल्हे ऊपर की ओर उठे हुए, शरीर एक उल्टे V जैसा।
  2. बाँहें मोड़ते हुए छाती को नीचे ज़मीन की ओर और फिर आगे की तरफ़ ले जाएँ, ज़मीन से बिलकुल सटाकर।
  3. इसी बहाव को जारी रखते हुए ऊपर वाली मुद्रा में आएँ: कूल्हे नीचे ज़मीन के पास, बाँहें सीधी, छाती उठी और खुली, नज़र सामने।
  4. अब कूल्हों को वापस ऊपर धकेलकर शुरुआती उलटी V में लौट आएँ। यह हुआ एक दंड। पूरी गति को जोड़े रखें, टूटने न दें।

कौन-कौन सी माँसपेशियाँ लगती हैं

धकेलने वाले हिस्से में कंधे, छाती और ट्राइसेप्स पर ज़ोर पड़ता है, जबकि पीठ और कोर पूरे चाप को संभालने का काम करते हैं। चूँकि दंड में शरीर बड़े दायरे में घूमता है, इससे कंधों, रीढ़ और कूल्हों का लचीलापन भी बढ़ता है।

फ़ायदे

  • पूरे शरीर की एक ऐसी कसरत जो एक ही गति में ताक़त और लचीलापन दोनों साधती है।
  • किसी उपकरण की ज़रूरत नहीं, बस थोड़ी सी खुली जगह चाहिए।
  • चाप में झूलते हुए छाती, कंधे और रीढ़ खुलते हैं।
  • एक पारंपरिक कसरत जो ज़्यादा गिनती में भी आराम से बढ़ाई जा सकती है।

आम गलतियाँ

  • चाप में जल्दबाज़ी। असली बात इस बहाव की सहजता में है। झटके से नहीं, संभलकर गति करें।
  • अधूरा दायरा। छाती को सचमुच नीचे और आगे तक ले जाएँ और ऊपर पूरी मुद्रा तक पहुँचें। छोटा चाप पूरा फ़ायदा नहीं देता।
  • कूल्हे जल्दी गिरा देना। जब तक छाती आगे न आ जाए, कूल्हे ऊँचे रखें, फिर नीचे उतरें। जल्दी झुक जाने से कमर पर खिंचाव पड़ता है।

भारतीय व्यायाम परंपरा में दंड

दंड पारंपरिक भारतीय कुश्ती और अखाड़े की तैयारी का अहम हिस्सा है, और पीढ़ियों से पहलवानों की रोज़मर्रा की कसरत रहा है। पहलवान अक्सर बहुत ज़्यादा गिनती में दंड लगाते हैं और धीरे-धीरे बड़ी संख्या तक पहुँचते हैं। यह भारत की अपनी ताक़त परंपरा की सबसे पहचानी कसरतों में से एक बना हुआ है।

कठिनाई और आगे बढ़ना

अगर पूरा चाप शुरू में कंधों पर भारी लगे, तो छोटे दायरे और कम गिनती से शुरू करें और समय के साथ लचीलापन बढ़ने दें। जैसे-जैसे सहज होते जाएँ, चाप को लंबा करें और धीरे-धीरे गिनती बढ़ाएँ। जब गति एकदम बहने लगे, तो परंपरागत तरीके की तरह लंबे सेट की ओर बढ़ें।

देखें सभी पुश-अप वेरिएशन, इससे मिलती-जुलती डाइव बॉम्बर पुश-अप आज़माएँ (चाप लगभग वैसा ही, पर आप उसी रास्ते वापस लौटते हैं), या पूरा 100 पुश-अप कार्यक्रम अपनाएँ।

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